Swagt Darakh

बादलों के गद्दे पर,
कुछ गानो की शीशियाँ रख,
गुमशुदा घाटियों के गाता है गीत कही…

मुझ में ‘दूसरा मैं’
या कही दूसरे मैं में ‘मैं’
शायद दूसरी ही बात है सही…

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Note: एक पाठक के ईमेल का रिप्लाय यहा दे रहा हूं। शायद किसी और के मन मे यही शंका हो सकती है।

” मेरी कवीताऐं Symbolic होती है। जिन्हे आप जितनी बार पढेंगे उतने अलग अलग मतलब निकाल आएेंगे। इस प्रकार कि कवीता मराठी मे ग्रेस नाम के कवी ने बहुत ही खुब लिखी है। हाला की हिंदी मेरी तृतीय भाषा है( मै एक मारवाडी परिवार , और मराठी ईलाके मे पलाबढा व्यक्ती हुं)। मैने हिंदी रचनाओं मे symbolism लाने का पुरा प्रयास किया है।

-स्वागत